स्वपोषी और परपोषी पोषण प्रणाली के बीच क्या अंतर है? Autotrophic and Heterotrophic Nutrition in Hindi

प्रस्तावना :

पोषण एक प्रक्रिया है जिसमें जीवों को उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऊर्जा और पौष्टिकता की आवश्यकता होती है। विभिन्न जीवों ने अपने जीवन के विकास और संरचनात्मक कार्यों के लिए विभिन्न पोषण प्रणालियों को विकसित किया है। इन प्रणालियों में दो प्रमुख प्रकार होते हैं – स्वपोषी और परपोषी पोषण प्रणालियाँ।

स्वपोषी ( Autotrophic )पोषण प्रणाली में, जीव स्वतंत्र रूप से अपने आहार की प्राप्ति करते हैं। इसका मतलब है कि वे खुद अपने आहार को पैदा कर सकते हैं, जो उनके जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा और पौष्टिकता प्रदान करता है। इस प्रकार के पोषण में, प्रकाश की ऊर्जा का सही तरीके से उपयोग करके जीव खुद अपने आहार को बना सकते हैं, जैसे कि पौधे फोटोसिंथेसिस के माध्यम से करते हैं।

परपोषी (Heterotrophic) पोषण प्रणाली में, जीव अन्य जीवों के द्वारा बनाए गए आहार का उपयोग करते हैं। इसका मतलब है कि वे खुद अपना आहार नहीं बना सकते और उन्हें अन्य जीवों के द्वारा बनाए गए जैविक यौगिकों की आवश्यकता होती है। इस प्रकार के पोषण में, जीव खाद्य पदार्थों को पचाने और उनमें से ऊर्जा और पौष्टिकता प्राप्त करते हैं, जैसे कि पशु और मनुष्य करते हैं।

Autotrophic and Heterotrophic Nutrition

स्वपोषी (Autotrophic) और परपोषी (Heterotrophic) पोषण प्रणाली के बीच कुछ मुख्य अंतर निम्नलिखित है:

स्वपोषी और परपोषी के बीच अंतर 

1. ऊर्जा का स्रोत:

  • स्वपोषी (Autotrophic): स्वपोषी जीव अपने आहार को खुद पैदा करते हैं, सामान्यत: प्रकाश की ऊर्जा (फोटोसिंथेसिस) या अन्य अजैविक यौगिकों (कैमोसिंथेसिस) का उपयोग करके।
  • परपोषी (Heterotrophic): परपोषी जीव अन्य जीवों द्वारा बनाए गए जैविक यौगिकों का उपयोग अपने आहार के रूप में करते हैं, जैसे कि खाद्य पदार्थों को पचाने और ऊर्जा प्राप्त करने के लिए।

2. कार्बन स्रोत:

  • स्वपोषी (Autotrophic): स्वपोषी जीव अपने प्रमुख कार्बन स्रोत के रूप में वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग करते हैं।
  • परपोषी (Heterotrophic): परपोषी जीव अपने प्रमुख कार्बन स्रोत के लिए अन्य जीवों द्वारा बनाई गई जैविक यौगिकों का उपयोग करते हैं।

3. ऊर्जा परिवर्तन:

  • स्वपोषी (Autotrophic): स्वपोषी जीव प्रकाश की ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं (आमतौर पर ग्लूकोज के रूप में) फोटोसिंथेसिस के माध्यम से।
  • परपोषी (Heterotrophic): परपोषी जीव अन्य जीवों द्वारा बनाए गए जैविक यौगिकों को साधारण रूप में विभाजित करके परिवर्तित करके ऊर्जा प्राप्त करते हैं, जैसे पाचन और श्वसन के माध्यम से।

4. आहार की प्राप्ति:

  • स्वपोषी (Autotrophic): स्वपोषी जीव स्वतंत्र रूप से अपने आहार की प्राप्ति करते हैं, क्योंकि वे खुद के आहार को पैदा कर सकते हैं।
  • परपोषी (Heterotrophic): परपोषी जीव अन्य जीवों के उत्पन्न आहार को खाकर आहार की प्राप्ति करते हैं, और उन्हें विभिन्न प्रकार की जैविक यौगिकों की आवश्यकता होती है।

5. पोषण प्रणाली की स्तर:

  • स्वपोषी (Autotrophic): स्वपोषी जीव पोषण प्रणाली की प्राधिकृत तरीके से शुरुआत करते हैं और अकेले ही अपने आहार को प्राप्त कर सकते हैं।
  • परपोषी (Heterotrophic): परपोषी जीव पोषण प्रणाली में उच्चतम स्तर तक पहुँचते हैं, और वे अन्य जीवों का आहार प्राप्त करके ऊर्जा प्राप्त करते हैं।

6. त्रोपिक स्तर:

  • स्वपोषी (Autotrophic): स्वपोषी जीव त्रोपिक स्तर में पोषण प्रणाली की शिखर पर पाये जाते हैं, क्योंकि उन्हें अन्य जीवों की प्रत्यक्ष आवश्यकता नहीं होती।
  • परपोषी (Heterotrophic): परपोषी जीव पोषण प्रणाली में उच्चतम स्तर पर स्थित होते हैं, और उन्हें सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से अन्य जीवों के आहार की आवश्यकता होती है।

7. पोषण प्रणाली की संरचना:

  • स्वपोषी (Autotrophic): स्वपोषी जीव पोषण प्रणाली में विशेषीकृत संरचनाएँ उपस्थित कर सकते हैं, जैसे कि क्लोरोप्लास्ट्स जो फोटोसिंथेसिस के लिए उपयोगी होते हैं।
  • परपोषी (Heterotrophic): परपोषी जीव पोषण प्रणाली में ऐसी विशेषीकृत संरचनाएँ अधिकांश नहीं होती हैं, क्योंकि उन्हें अपने आहार को विभिन्न तरीकों से प्राप्त करने की क्षमता होती है।

8. ऊर्जा के स्रोत की स्थिति:

  • स्वपोषी (Autotrophic): स्वपोषी जीव ऊर्जा के स्रोत को स्थानिक रूप से प्राप्त करते हैं और उन्हें अपने आस-पास की वातावरण के तत्वों का उपयोग करने की क्षमता होती है।
  • परपोषी (Heterotrophic): परपोषी जीव ऊर्जा के स्रोत को अन्य जीवों से प्राप्त करते हैं और उन्हें उन जीवों के आहार की आवश्यकता होती है जो उनके आस-पास होते हैं।

9. ऊर्जा प्रवाह का प्रमुख दिशा:

  • स्वपोषी (Autotrophic): स्वपोषी जीव ऊर्जा प्रवाह को प्राथमिक रूप से ऊपर से नीचे दिशा में दिखते हैं, क्योंकि वे ऊर्जा को उज्ज्वल ऊर्जा से रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।
  • परपोषी (Heterotrophic): परपोषी जीव ऊर्जा प्रवाह को प्राथमिक रूप से नीचे से ऊपर दिशा में दिखते हैं, क्योंकि वे उर्जा को अन्य जीवों से प्राप्त करते हैं जो उनसे नीचे के तत्वों की प्राप्ति करते हैं।

ये मुख्य अंतर स्वपोषी और परपोषी पोषण प्रणालियों के बीच पाए जाते हैं, जो उनके आहार और ऊर्जा प्राप्ति के तरीकों में होते हैं।

Similarity between Autotrophic and Heterotrophic Nutrition

स्वपोषी (Autotrophic) और परपोषी (Heterotrophic) पोषण प्रणालियों के बीच कुछ समानताएं हैं:

  1. आहार की आवश्यकता: दोनों प्रणालियाँ जीवों के लिए आहार की आवश्यकता को पूरा करने के लिए होती हैं।
  2. ऊर्जा प्राप्ति: दोनों प्रणालियाँ ऊर्जा प्राप्त करने के तरीकों में विभिन्न तरीकों का उपयोग करती हैं, चाहे स्वयं अपना आहार उत्पन्न करके (स्वपोषी) या अन्य जीवों के बनाए गए आहार का उपयोग करके (परपोषी)।
  3. पोषण प्रणाली: इन दोनों प्रणालियों का मुख्य उद्देश्य जीवों को ऊर्जा और पौष्टिकता प्रदान करना होता है ताकि उनके विकास और कार्यों के लिए आवश्यकताएं पूरी हो सकें।
  4. बायोमास अनुकूलन: दोनों प्रणालियाँ बायोमास अनुकूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, क्योंकि वे जीवों के बीच ऊर्जा और माल के प्रवाह को संरक्षित रखती हैं।
  5. जीवन के लिए आवश्यकताएं: दोनों प्रणालियाँ जीवों के जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा, कार्बन, प्रोटीन, विटामिन, खनिज आदि की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करती हैं।

 

निष्कर्ष :

इस प्रकार, स्वपोषी और परपोषी पोषण प्रणालियों में कुछ महत्वपूर्ण समानताएं होती हैं। पहली बात तो यह है कि दोनों प्रणालियाँ जीवों को उनकी ऊर्जा और पौष्टिकता की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करती हैं। दोनों ही प्रणालियाँ उन्हें उनके विकास और संरचनात्मक कार्यों के लिए आवश्यकताएं प्रदान करती हैं।

साथ ही, ये दो प्रणालियाँ जीवों की आहार व्यवस्था को संचालित करने में मदद करती हैं। स्वपोषी प्रणाली में जीव स्वतंत्र रूप से अपना आहार उत्पन्न कर सकते हैं, जबकि परपोषी प्रणाली में जीव अन्य जीवों के बनाए गए आहार का उपयोग करते हैं।

इन दोनों प्रणालियों का अपना महत्व है और यह जीवों के बढ़ने और विकसित होने में मदद करता है। इनके द्वारा जीवों को उनकी आवश्यकताओं का पूरा किया जाता है और यह समृद्धि और जीवन की सुरक्षा में मदद करता है।

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