चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 में 10 मुख्य अंतर ( 10 Major Difference between Chandrayaan-2 and Chandrayaan-3 )

प्रस्तावना : चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 भारत के चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम के दो महत्वपूर्ण मिशन हैं। चंद्रयान-2 को 22 जुलाई, 2019 को लॉन्च किया गया था और 7 सितंबर, 2019 को चंद्रमा की सतह पर उतरा था। चंद्रयान-3 को 23 जुलाई, 2023 को लॉन्च किया गया था और 24 अगस्त, 2023 को चंद्रमा की सतह पर उतरा था। आज के आर्टिकल में हम चंद्रयान-2 और चंद्रयान-3 के बीच १० अन्तरो को विस्तार से समझेगे :

  • मिशन का उद्देश्य:
    • Chandrayaan-3: इसका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर लैंडिंग करना है।
    • Chandrayaan-2: इसका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर लैंडर और रोवर को सफलतापूर्वक भेजकर वहाँ के भूमि संरचना और जलवायु की अध्ययन करना था।
  • मिशन की श्रेणी:
    • Chandrayaan-3: यह एक लैंडिंग मिशन है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर स्थिर होना है।
    • Chandrayaan-2: यह था एक कम्प्रेहेंसिव मिशन जिसमें एक ओरबिटर, एक विकिरण और उपग्रह, और एक रोवर शामिल थे।
  • लैंडर की स्थिति:
    • Chandrayaan-3: यह केवल लैंडर के साथ होगा, जिसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर स्थिर होना है।
    • Chandrayaan-2: इसमें लैंडर का नाम विक्रम था, लेकिन यह सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर नहीं पहुंच सका।
  • उपयोगी जीवन:
    • Chandrayaan-3: इसका लक्ष्य मुख्य रूप से चंद्रमा पर स्थिति की जांच करना है, और अन्य उपयोगी जीवन की खोज करना है।
    • Chandrayaan-2: इसका मिशन चंद्रमा की सतह पर जलवायु, भूमि संरचना, और उपयोगी जीवन की खोज करना था।
  • विज्ञान का योगदान:
    • Chandrayaan-3: इसमें विज्ञानिक अनुसंधान की कम अनुमति है, क्योंकि यह सिर्फ स्थिर होने की कोशिश में है।
    • Chandrayaan-2: इसमें विशेषज्ञों ने चंद्रमा की भूमि संरचना, जलवायु, और उपयोगी जीवन की अध्ययन करके विज्ञान में योगदान किया।
  • प्रक्षेपण और उपयोगी लोड:
    • Chandrayaan-3: इसमें अधिकांश जलवायु स्थानों की जानकारी को दर्शाने के लिए उपयोगी लोड नहीं होगा।
    • Chandrayaan-2: इसमें रोवर के साथ विकिरण और उपग्रह, जिनमें उपयोगी जीवन की खोज करने के उपकरण शामिल थे।
  • मिशन की अवधि:
    • Chandrayaan-3: इसका मिशन छोटा होगा और सिर्फ लैंडिंग की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
    • Chandrayaan-2: इसका मिशन बड़ा था और चंद्रमा की सतह पर उपयोगी जीवन की खोज करने के लिए विशेषज्ञों के साथ सालों तक काम किया गया था।
  • विज्ञापन और राष्ट्रीयता:
    • Chandrayaan-3: इसका उद्घाटन भारत के अंतरिक्ष प्रोजेक्ट की और एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
    • Chandrayaan-2: इसका उद्घाटन भी भारत के अंतरिक्ष प्रोजेक्ट की महत्वपूर्ण प्रस्तावना था, लेकिन लैंडिंग में सफलता नहीं मिली।
  • विज्ञानिक योगदान:
    • Chandrayaan-3: यह मिशन विज्ञानिकों को चंद्रमा की सतह की और अधिक जानकारी प्रदान कर सकता है, जिससे हम उसकी संरचना को समझ सकते हैं।
    • Chandrayaan-2: इस मिशन ने विज्ञानिकों को चंद्रमा की सतह पर जलवायु, भूमि संरचना, और उपयोगी जीवन की अध्ययन करने का अवसर प्रदान किया।
  • सफलता की उम्मीद:
    • Chandrayaan-3: यह मिशन सफल रहा , और अब वहां सतह पर अनुसन्धान करेगा ।
    • Chandrayaan-2: यह मिशन सामान्यत: सफल नहीं था, क्योंकि लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक पहुंच नहीं पाया।

 

उपसंहार : चंद्रयान-3 और चंद्रयान-2 के बीच के मुख्य अंतरों को समझने पर, हम देखते हैं कि इन दोनों मिशनों के प्रमुख उद्देश्य और तकनीकी विशेषताएँ एक-दूसरे से भिन्न थीं। चंद्रयान-2 का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग करना और विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए तत्वों की खोज करना था। विपरीत चंद्रयान-3 का उद्देश्य चंद्रयान-2 की विफलता को ठीक करना और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर नरम लैंडिंग करना था। तकनीकी दृष्टि से, चंद्रयान-3 में उपयुक्त परिवर्तन किए गए थे, जैसे कि इसके लैंडर में अधिक सुरक्षित नेविगेशन और लैंडिंग के तंत्र हैं। यहाँ तक कि चंद्रयान-3 ने सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर नरम लैंडिंग की। इन दोनों मिशनों की सफलता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होती है, जिससे देश की अंतरिक्ष अनुसंधान की क्षमता को मजबूती से प्रकट किया गया है।

 

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